बगुला भगत और केकड़े की कहानी   (Bagula Bhagat Ki Kahani )

किसी जंगल में एक बहुत बड़ा तालाब था उसमे अनेक जीवजन्तु निवास करते थे और उसी तालाब के किनारे एक बगुला भी रहता था जो की काफी बुढा हो चूका था और अपने भोजन के लिए मछलियों को पकड़ने में असमर्थ था जिसके कारण उसका भूख से बुरा हाल था और एक दिन अपने पिछले कार्यो पर पश्चाताप करके आशु बहा रहा था की  अचानक वहा एक केकड़ा आया और पूछा “आप रो क्यू रहे है आज मछलिया भी पकड़ नही रहे है”

यह सुनकर बगुला बोला “मै बहुत ही पापी हु हमेसा निर्दोषों का जान लिया है अब मुझे प्रायश्चित हो रहा है अब मै इन जंतुओं को न मारकर केवल फल खाकर जीवन गुजारा करूंगा”

लेकिन बगुले के इस तरह भगत बनने पर केकड़े को विश्वास नही हो रहा था की भला दुसरो की हत्या करने वाला कबसे भक्त बन गया फिर भी आप रो क्यों रहे है तो इसपर बगुले ने कहा की “मैंने ज्योतिषी की बात सुन रखी है की इस साल भयंकर सुखा पड़ने वाला है इसी बात को लेकर चिंता हो रही है अब सारे जल के जन्तु बेमौत मारे जायेगे इसलिए मुझे इस बात का दुःख हो रहा है”

यह बात सुनकर केकड़ा सभी जन्तुओ और मछलियों को यह बात बता दी तो सभी जन्तु अपना प्राण बचाने के लिए बगुले के पास आये और सूखे से बचने का उपाय पूछने लगे तो बगुला बोला की पास में ही इससे भी बड़ा तालाब है वहा आप लोग पहुच जाये तो आपका जीवन बच सकता है तो सभी अपने प्राणों की चिंता को लेकर बगुले से प्रार्थना करने लगे की आप हमे वहा पंहुचा दीजिये यह बात सुनकर केकड़े को बगुले पर विश्वास तो नही हो रहा था लेकिन सब अपने जान बचाने के लिए कुछ भी करने को तैयार थे वो कहते है न मुसीबत के समय लोग अपने दुश्मन के साथ भी हाथ मिलाने को तैयार हो जाते थे यही उन सब जीवो के साथ भी हुआ

और इस तरह बगुला अपने चाल में कामयाब हो गया और रोज अपने चोच में मछलियों को पकड़ ले जाता और दूर जंगल में पत्थरों पर उन मछलियों को पटक कर मार डालता और फिर उन्हें खा जाता इस प्रकार उसके अच्छे दिन फिर से आ गये थे उसे तो भोजन अब बिना किसी मेहनत से ही जो मिलने लगा था

इसी तरह दिन बीतता जा रहा था की एक दिन केकड़े ने भी आप मुझे भी ले चलिए वहा पर क्यूकी मुझे भी तो अपनी जान बचानी है तो यह सुनकर बगुला मन ही मन खुश हुआ चलो अच्छा है आज नये जीव का स्वाद खाने को मिलेगा और फिर केकड़े को अपने पीठ पर बैठाकर ले जाने लगा और फिर ऊचे आकाश में बगुला खुश होते हुए बोला “तुम कितने भोले हो और यहा के लोग कितने भोले है बिना जाने सुने सबने मुझपर विश्वास कर लिए अब सबको अपने जान से हाथ धोना पड़ रहा है आज तुम्हे भी मारकर खा जाऊंगा”

यह बात सुनकर केकड़े को पक्का विश्वास हो गया है यह बगुला भगत नही धूर्त है और समय से पहले ही आपने अपने नीति बताकर अच्छा किया और फिर धीरे धीरे केकड़ा सरकते हुए बगुले के गर्दन के पास पहुच गया और कसकर अपने नुकीले दातो से बगुले की गर्दन काट दिया जिससे धडाम से बगुला आकाश से जमीन पर गिरा और प्राण गवा बैठा लेकिन केकड़ा बगुले से चिपके होने से तनिक भी चोट नही आई और फिर तालाब के पास आकर यह बात सबको बताई तो सब बिना सोचे समझे अपने दुश्मन की बातो पर विश्वास करने को लेकर बहुत ही शर्मिंदा हुए और सबने फिर भविष्य में ऐसे किसी पर विश्वास न करने की कसमे खायी.

कहानी से शिक्षा

छल और धोखा से दुसरो को हानि पहुचाने वाले लोभियों का अंत भी बुरा होता है और हमे कभी भी किसी पर बिना जाने सुने विश्वास नही करना चाहिए.

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